Tuesday, 12 January 2016

विचारधारा

व्यक्ती नही विचारधारा...

इन दिनो देेश मे सबसे ज्यादा चर्चा किए जानेवाले विषयों मे से एक विषय है अयोध्या राम मंदिर निर्माण | देखा जाए तो यह काफी पुराना विषय है | आजादी के दौर से चला आ रहा है | अगर चाह हो तो बडी आसानी से इस समस्या का हल निकाला जा सकता है पर अपना फायदा कराने के चक्कर मे कोई भी बुद्धिजीवी(?) व्यकती इस समस्या को सुलझाना नही चाहता |
    अपनी सलतनत के दौरान मुघल राजा बाबर ने अयोध्या मे बाबरी मस्जिद बनवायी | आजादी के बाद तक के दो सालों तक इस मस्जिद मे इबादत हुआ करती थी | पर  सन १९४८-४९ से कुछ लोगोंद्वारा यह बात रखी जाने लगी की बाबरी मस्जिद असल मे हिंदू राजा राम जिन्हे की ईश्वर का अवतार माना जाता है, उनकी यह जन्मभूमी है और इसी कारण वहा राम मंदिर होना चाहिए | इस विषय पर वाद और हिंसा से पूरा देश भलिभांति अवगत है | उस हिंसा के कारण कई बेगुनाह लोगों ने अपनी जान गवा दी | उस तणाव का आज भी हिंदू और मुस्लिम जाती के रिश्तों पर नजर आता है |
       सालों बीतने के बाद, आज भी इस मुद्दे का हल निकालने नाम पर होता है सिर्फ राजकारण | क्यों हम हमारे भगवान को किसी जमीन के तुकडे का मोहताज माने??? चाहे वो भगवान राम हो चाहे पैगंबर  साहाब ये दोनो भी व्यक्तिरूपी विचारधारा थी, है, रहेगी और हमे उनके विचारों एंव उनकी सिख को अपनाना चाहिये ना कि मंदिर मस्जिद के नाम पर लढते रहना चाहिये | आज हमे मंदिर या मस्जिद से ज्यादा लोगों की मुलभूत सुविधाओं पर लक्ष केंद्रित करने की जरूरत है और यह बात उन मंदिर- मस्जिद के नुमाइंदो को समझनी होगी | पर कहते है ना सोते हुए इंसान को जगाया जा सकता है पर सोने का नाटक कर रहे इंसान को जगाना नामुमकिन है| मेरी नजर मेवो नुमाइंदे सोने का नाटक कर रहे इंसान से कम नही | और इन्हे जगाना सिर्फ आम जनता के हाथ मे है पता नही जनता खुद कब जागेगी?

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