Sunday, 17 July 2016

शापित खुबसुरती

शापित खुबसुरती....

      'खुबसुरती' ये एक ऐसा शब्द है जिसपर पुरी दुनिया लट्टू है| इस दुनिया मे शायद ही कोई ऐसा शक्स हो जो खुबसुरती का कायल न हो और जिसे उसकी चाह न हो| फिर भलेही वह उपरी सौदर्य ही क्यो न हो हर कोई बस उसे पाना चाहता है|
     पर अपनी चाहत मे लोग अक्सर  भूल जाते है की खूबसुरती हमेशा शापित होती है| जो चीज जितनी खूबसुरत दिखायी देती है उसकी हकीकत उतनीही दर्दनाक होती है|
यकीन ना हो तो दुनिया की हर उस चीज, इन्सान या जगह को जानलो जिसे दुनिया ने खुबसुरती की मिसाल कहकर सराया है| फिर चाहे वो धरती का स्वर्ग कहा जानेवाला 'काश्मिर' हो जो पिछले कई सालों से  सत्ता की आग जल रहा है|  प्यार की मिसाल माने जाता हुआ ' ताजमहाल' भी कोई कम बदनसीब नही है, युं तो इसे प्यार का मंदिर कहा जाता है पर है तो एक कब्र ही ना...२००० कारागिरों के मेहनत और हाथों की कुर्बानी से बना | इसकी बदकिस्मती तो देखो आज भी दुआ से ज्यादा इसे बददुआए सहनी पडती है|
खैर ये तो फिर भी चीजे है ...बेजान पर  अपने जमाने की सबसे बेहतरीन अदाकारा के तौर पर जाने जाते मीना कुमारी, मधुबाला जैसी अभिनेत्रीयोंने भी क्या कम शाप पाया है अपनी जिंदगी मे? | हर किसी की खूबसुरती का अपना ही दर्द है और उस दर्द की किमत हर किसी को चुकानी ही पडती है|  विदेशों के भी अपने किस्से होंगे
न जाने क्यूं ये खूबसुरती हमेशा ही शापित होती है? फिर कभी किसी खूबसुरती को देखो तो उसके शाप को जानने की कोशिश जरूर करना क्या पता कोनसी नयी कहानी मिल जाए|

Tuesday, 12 January 2016

विचारधारा

व्यक्ती नही विचारधारा...

इन दिनो देेश मे सबसे ज्यादा चर्चा किए जानेवाले विषयों मे से एक विषय है अयोध्या राम मंदिर निर्माण | देखा जाए तो यह काफी पुराना विषय है | आजादी के दौर से चला आ रहा है | अगर चाह हो तो बडी आसानी से इस समस्या का हल निकाला जा सकता है पर अपना फायदा कराने के चक्कर मे कोई भी बुद्धिजीवी(?) व्यकती इस समस्या को सुलझाना नही चाहता |
    अपनी सलतनत के दौरान मुघल राजा बाबर ने अयोध्या मे बाबरी मस्जिद बनवायी | आजादी के बाद तक के दो सालों तक इस मस्जिद मे इबादत हुआ करती थी | पर  सन १९४८-४९ से कुछ लोगोंद्वारा यह बात रखी जाने लगी की बाबरी मस्जिद असल मे हिंदू राजा राम जिन्हे की ईश्वर का अवतार माना जाता है, उनकी यह जन्मभूमी है और इसी कारण वहा राम मंदिर होना चाहिए | इस विषय पर वाद और हिंसा से पूरा देश भलिभांति अवगत है | उस हिंसा के कारण कई बेगुनाह लोगों ने अपनी जान गवा दी | उस तणाव का आज भी हिंदू और मुस्लिम जाती के रिश्तों पर नजर आता है |
       सालों बीतने के बाद, आज भी इस मुद्दे का हल निकालने नाम पर होता है सिर्फ राजकारण | क्यों हम हमारे भगवान को किसी जमीन के तुकडे का मोहताज माने??? चाहे वो भगवान राम हो चाहे पैगंबर  साहाब ये दोनो भी व्यक्तिरूपी विचारधारा थी, है, रहेगी और हमे उनके विचारों एंव उनकी सिख को अपनाना चाहिये ना कि मंदिर मस्जिद के नाम पर लढते रहना चाहिये | आज हमे मंदिर या मस्जिद से ज्यादा लोगों की मुलभूत सुविधाओं पर लक्ष केंद्रित करने की जरूरत है और यह बात उन मंदिर- मस्जिद के नुमाइंदो को समझनी होगी | पर कहते है ना सोते हुए इंसान को जगाया जा सकता है पर सोने का नाटक कर रहे इंसान को जगाना नामुमकिन है| मेरी नजर मेवो नुमाइंदे सोने का नाटक कर रहे इंसान से कम नही | और इन्हे जगाना सिर्फ आम जनता के हाथ मे है पता नही जनता खुद कब जागेगी?

Sunday, 10 January 2016

नयी शुरवात

नयी शुरवात.....

काफी दिनो से सोच रही थी अपना ब्लॉग शुरू किया जाय पर यही सोच कर रूक जाया करती थी के आखिर लिखूंगी क्या मे? पर समय की मांग है के मुझे अपने विचारों को शब्दबद्ध करना है तो सोचा क्यो न शुरवात करे? आगे जो होगा देखा जाएगा| तो बस हमने आरंभ तो कर दिया है बस अब कोशिश रहेगी के ये सिलसिला कभी रूके ना|
    खैर आज शुरवात की है तो आज कुछ विचारों को व्यक्त करना तो बनता है| पत्रकारिता मे आने के बाद कई चीजो को देखने का नजरिया बदल जाता है| आप अपने आस पास घट रही हर घटना को गंभीरता पूर्व समझने की कोशिश करते है और उस घटना के परिणाम को लोगो को बताना अपना परम कर्तव्य मानने लगते है| ये सही भी है और जरूरी भी पर क्या होगा अगर आप के आखो के सामने दिख रही घटना सिक्के का सिर्फ एक पैलू हो और दुसरा पैलू अशोक चिन्ह पर बने चौथे शेर की तरह दिखायी न दिया हो...अगर ऐसा है तो उस घटना ते प्रति आपका विचार अर्ध्यसत्य के समान होगा जो हर हाल मे गलत होगा| बेशक इसबारे मे हर किसी के विचार अलग होंगे....और अपने विचारो के विरूद्ध विचारों को जानना जरूर चाहूंगी मे| पर मुझे विश्वास है की मेरा विचार सही है और जब आपको अपने सही होने पर यकीन होता है तब इस बात से कोई फर्क नही पडता की कौन आपसे सहमती रखता है और कौन नही|