Sunday, 10 January 2016

नयी शुरवात

नयी शुरवात.....

काफी दिनो से सोच रही थी अपना ब्लॉग शुरू किया जाय पर यही सोच कर रूक जाया करती थी के आखिर लिखूंगी क्या मे? पर समय की मांग है के मुझे अपने विचारों को शब्दबद्ध करना है तो सोचा क्यो न शुरवात करे? आगे जो होगा देखा जाएगा| तो बस हमने आरंभ तो कर दिया है बस अब कोशिश रहेगी के ये सिलसिला कभी रूके ना|
    खैर आज शुरवात की है तो आज कुछ विचारों को व्यक्त करना तो बनता है| पत्रकारिता मे आने के बाद कई चीजो को देखने का नजरिया बदल जाता है| आप अपने आस पास घट रही हर घटना को गंभीरता पूर्व समझने की कोशिश करते है और उस घटना के परिणाम को लोगो को बताना अपना परम कर्तव्य मानने लगते है| ये सही भी है और जरूरी भी पर क्या होगा अगर आप के आखो के सामने दिख रही घटना सिक्के का सिर्फ एक पैलू हो और दुसरा पैलू अशोक चिन्ह पर बने चौथे शेर की तरह दिखायी न दिया हो...अगर ऐसा है तो उस घटना ते प्रति आपका विचार अर्ध्यसत्य के समान होगा जो हर हाल मे गलत होगा| बेशक इसबारे मे हर किसी के विचार अलग होंगे....और अपने विचारो के विरूद्ध विचारों को जानना जरूर चाहूंगी मे| पर मुझे विश्वास है की मेरा विचार सही है और जब आपको अपने सही होने पर यकीन होता है तब इस बात से कोई फर्क नही पडता की कौन आपसे सहमती रखता है और कौन नही|

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